Issue : 20, July - August

AUTHOR NAME : Dr. Purushottam Badrinath Patil

“भारतीय साहित्य में प्रचलित तमाम विमर्शों में दलित विमर्श एक सशक्त और ज्वलंत सामाजिक विमर्श के रूप में स्थापित है। इस आलेख में विवेच्य कालखण्ड उसकी स्थापना और परिष्कृत होने वाले काल का विवेचन है।

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